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VAAGDHARA raised and strengthen the voice at the 41st Human Rights Commission held in the United Nations, Geneva, stating Tobacco as the major means for Human Rights Violation

During the 41st Human Rights Commission Council meeting, VAAGDHARA along with partners organisation Action on Smoking & Health (ASH) and Shivi Development Society (SDS) held a meeting with the United Nations and urge to make special efforts to curb the harmful effect of tobacco on Human Rights. Prohibition of tobacco will stop the Violation of Human Rights. Use of Tobacco in smoke or smoke-free state is totally contrary to Human Rights because at the grassroots level it is a sponsored nature of the violation of rights of children and economic rights. During the meeting, officials of the World Health Organisation (WHO) Dr Nicholas and Laurent Huber said that human rights are being constantly violated by tobacco companies. Session Director Meera Bharadwaj told that, in the special discussion, it has been accepted that the consumption of tobacco is the violation of rights of children, tribal and backward areas. In coming times, the issue of tobacco prohibition must be specifically raised by the Human Rights Council.

Mr Jayesh Joshi, raising this issue on the world's biggest platform, described tobacco as an important tool for human rights violation and the violation of rights of tribal children. He told that the policymakers are deliberately misled by tobacco companies in order to increase their business by increasing the use of tobacco, and the violation of effective laws has been continuous, with which the World Health Organization Framework Convention on Tobacco Control (WHO-FCTC) and the COTPA ACT in India does not have effective implementation in the grassroots and remote areas which is the violation of  Human Rights.  He also informed that on the occasion of World Tobacco Free Day the present government of Rajasthan State in the country got impressed by the continuous efforts of the VAAGDHARA Institution and Chief Minister Shri Ashok Gehlot announced that in Rajasthan the production, storage, distribution and advertisement of e-cigarette have been fully banned to which all the members present there appreciated and applauded. On which Jayesh Joshi through this platform delivered that there is a need to make continuous efforts to free the families from economic slavery and to increase their livelihood opportunities.

संयुक्त राष्ट्र संघ, जिनेवा में आयोजित 41वें मानवाधिकार आयोग काउंसिल की बैठक में तम्बाकू को मानवाधिकारों के हनन का मुख्य साधन बताने की आवाज बुलंद की वाग्धारा ने

41वें मानवाधिकार आयोग काउंसिल की बैठक के दौरान वाग्धारा एवम साथी संस्था एक्शन ऑन स्मोकिंग एंड हेल्थ और शिवी डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा बैठक आयोजित कर संयुक्त राष्ट्र संघ को अर्ज किया गया की संयुक्त राष्ट्र संघ तम्बाकू से होने वाले  मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए विशेष प्रयास करे | तम्बाकू निषेध होने पर मानवाधिकार हनन रुक सकेगा | तम्बाकू का प्रयोग धुए रहित एवं धुए के साथ प्रयोग पूर्ण रूप से मानवाधिकारों का उलन्ग्न हैं | क्यूंकि जमीनी स्तर पर बालको के अधिकार व् आर्थिक अधिकारों के हनन का एक प्रायोजित स्वरूप हैं | बैठक के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पदाधिकारी डॉक्टर निकोलस और लोरेंट हुबेर ने अपनी बात रखते हुए बताया की तम्बाकू कम्पनियों द्वारा निरंतर मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा हैं | सत्र संचालक मीरा भारद्वाज द्वारा इस विषय को समाहित करते हुए बताया गया की विशेष रूप से हुई चर्चा में यह स्वीकार किया गया हैं की यह बाल अधिकार, जनजातिय एवं पिछड़े क्षेत्रो के अधिकारों का हनन हैं | इसे मानवाधिकार काउंसिल द्वारा आने वाले समय में विशेष रूप से तम्बाकू निषेध के मुद्दे को उठाना चाहिए |

श्रीमान जयेश जोशी द्वारा यह विषय विश्व के सबसे बड़े मंच पर उठाकर तम्बाकू को मानवाधिकार हनन व् जनजातिय बालकों के अधिकारों के हनन का एक महत्वपूर्ण हत्कंडा बताया | उन्होंने बताया की निति निर्माताओ को अलग अलग तरीकों से दिगभ्रमित कर कम्पनियों द्वारा अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए तम्बाकू का उपयोग बढ़ाया जाता हैं एवं प्रभावी कानूनों का हनन निरंतर किया जाता रहा हैं जिससे विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टोबैको कंट्रोल (WHO-FCTC) व् भारत में COTPA ACT (तम्बाकू नियन्त्रण अधिनियम) को भी जमीनी स्तर व् दूरदराज क्षेत्रों में प्रभावी किर्यान्वयन नहीं होने दिया जाता हैं, जो की मानवाधिकारों का हनन हैं | साथ ही उन्होंने बताया की भारत देश में राजस्थान राज्य की वर्तमान सरकार द्वारा विश्व तम्बाकू मुक्त दिवस के अवसर पर, वाग्धारा संस्था के निरंतर प्रयासों से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री श्रीमान् अशोक गहलोत ने यह घोषणा की, कि राजस्थान में ई-सिगरेट के उत्पादन, भण्डारण, वितरण और विज्ञापन पर पूरी तरह से प्रतिबन्ध लगाया गया है | जिसको वहाँ उपस्थित सभी सदस्यों ने सराहा |

जिस पर श्रीमान जयेश जोशी द्वारा मंच के माध्यम से परिवारों को आर्थिक गुलामी से मुक्त व् उनको आजीविका की ओर बढ़ाने की दिशा में सतत प्रयास करने की आवश्यकता बताई |

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