ग्राम पंचायतो को बाल मित्र बनाना है तो सबसे पहले बच्चो के प्रति संवेदनशील होने कि जरुरत

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बांसवाड़ा 13 अगस्त, जिला प्रशासन, वाग्धारा संस्थान और सेव द चिल्ड्रन के संयुक्त तत्वावधान में पंचायत समिति बाँसवाड़ा, तलवाड़ा, कुशलगढ़ एवं गढ़ी  में आज सरपंचों और ग्राम विकास अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया । प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य सभी ग्राम पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समिति का पुनर्गठन कर नियमित बैठको की मदद से कैसे उनको कार्यशील बनाया जाये को लेकर रहा । ताकि आने वाले समय में पुरे बाँसवाड़ा जिले को बाल श्रम से मुक्त कर बाल मित्र ज़िला घोषित करवा सके ।

बाँसवाड़ा पंचायत समिति के प्रशिक्षण में  मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य मधुसुधन व्यास ने कहाँ की अपनी ग्राम पंचायतों में बाल संरक्षण समितियों को मजबूत बनाते हुए बच्चों को बाल श्रम एवं बाल विवाह से मुक्त करवाकर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की जरूरत है ताकि उनका आने वाला भविष्य बेहतर हो ।

तलवाड़ा पंचायत समिति में माजिद खान ने प्रशिक्षण के दौरान सहभागियो को संबोधित करते हुए आह्वान किया कि अगर हमारी ग्राम पंचायतो को बाल मित्र बनाना है तो सबसे पहले हमें बच्चो के प्रति संवेदनशील होकर आगामी एक सप्ताह में तलवाडा पंचायत समिति की समस्त ग्राम पंचायतो में ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन किया जा सके । गठन के उपरान्त अपनी अपनी ग्राम पंचायतो में बच्चो की वंचितता का आंकलन कर बाल संरक्षण हेतू वार्षिक कार्ययोजना का निर्माण करना होगा ताकी हर माह समिति कि नियमित बैठक कर बाल संरक्षण के लिए किए जाने वाले प्रयासो कि समीक्षा तय कार्ययोजना अनुसार कि जा सके ।

गढ़ी पंचायत समिति में सहायक विकास अधिकारी श्रीमान सोहनलाल चरपोटा ने सभी प्रतिभागियों से निवेदन किया कि वह अपने अपने ग्राम पंचायत में बाल संरक्षण समिति का गठन करे । उन्होंने बाल संरक्षण, बाल अधिकारों और चाइल्ड लाइन 1098 को महत्व देते हुए सभी सरपंचों और ग्राम विकास अधिकारीयों से आग्रह किया की वह बाल संरक्षण के मुद्दे पर सामूहिक रूप से कार्य करे ।

कुशलगढ़ पंचायत समिति ब्लाक कुशलगढ़ संरक्षण विषय पर आयोजित अक दिविसीय प्रशिषण में मुख्य अथिति के रूप में में उप खण्ड अधिकारी विज्येश पंड्या ने अपने उधाभोधन में बताया की हम सभी को एक  ही कम करना है जहा कही भी बच्चो से जुडी समस्याऐ हो तो तुरंत उसका अपने स्तर पर निधान करना है| बाल संरक्षण विषय पर अपनी बात रखते हुए बताया की कई आदिवासी परिवार आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए अपने बच्चों को भेड़ चराने के लिए गड़रियों को वार्षिक अनुबन्ध पर दे देते है जिससे उन बच्चों के अधिकारों का हनन होता है और उनका बचपन परिवार के आर्थिक बोझ को उठाने में गुजर जाता है । इसी क्रम में तहसीलदार प्रवीण कुमार मीणा ने बताया की जिस प्रकार संविधान ने हम सबको मौलिक अधिकार दिए है उसी प्रकार बच्चों को प्राप्त चारों अधिकारों का संरक्षण की ज़िम्मेदारी जमीनी स्तर पर हम सबकी है ।

विकास अधिकारी पप्पू लाल मीणा ने बताया की सभी सरपंचों व ग्राम विकास अधिकारीयों को बच्चों के प्रति अति संवेदनशील होकर कार्य करने की जरूरत है ताकि हम सभी हमारी पंचायत समिति के समस्त बच्चों को उनके बाल  संरक्षण  अधिकारो के प्रति जागरूक कर सके व पंचायत स्तरीय सुरक्षा समितियो का गठन किया जाना चाहिये । साथ ही पालनहार योजना के बारे में बताया की ऐसा कोई भी परिवार हो तो इस योजना से जोड़ा जाये जिस से उस बच्चे को इस  योजना के अंतर्गत लाभ मिल सके ।

चाइल्ड लाइन 1098 से जिला समन्वयक परमेश पाटीदार ने चाइल्ड लाइन द्वारा किये जा रहे प्रयासों से अवगत करवाते हुए समस्त सहभागियों से निवेदन किया की जब भी कोई बच्चा किसी भी प्रकार की मुसीबत में हो या किसी भी प्रकार की मदद की जरूरत हो तो तत्काल चाइल्ड लाइन पर फ़ोन करके सूचित कराया जाये ताकि उन बच्चों को तत्काल मदद पहुचाई जा सके ।

उक्त प्रशिक्षण में सेव द चिल्ड्रन से दिनेश मेघवाल, बाबू सिंह मीणा अतिरिक्त विकास अधिकारी बाँसवाड़ा, दिनेश पाटीदार अतिरिक्त विकास अधिकारी तलवाड़ा वाग्धारा संस्था से सैम जैकब, बसुडा कटारा, कांतिलाल यादव, शोभा सोनी, प्रियंका पराशर, कृष्णा सिंह,कमलेश बुनकर, बाबूलाल चौधरी, संजय जोशी इत्यादि का प्रशिक्षण के सफ़ल आयोजन में सहयोग रहा ।

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