वागड़ की धरती पर बापू के स्वराज के सपने को साकार करता जनजातीय स्वराज सम्प्रभुता समागम 2019 का भव्य शुभारंभ

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धारवाड़ कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व उप कुलपति डॉ वैंकटेश्वरलु के मुख्य आतिथ्य में मिट्टी पूजन के साथ ही कृषि एवं जनजातीय स्वराज सम्प्रभुता समागम 2019 का भव्य शुभारंभ मंगलवार को कुपड़ा स्थित वाग्धारा प्रांगण में स्वागत गीत तथा मुख्य अतिथि एवम गणमान्य अतिथियों द्वारा उद्बोधन के साथ हुआ । वागधारा द्वारा गाँधीजी की 150 वीं जयंती के अवसर पर जनजातिय स्वराज अभियान 2019 का आयोजन राजस्थान, मध्य-प्रदेश, और गुजरात के संगम पर आधारित जनजातिय ह्रदय स्थल पर किया गया  है| सतीश आचार्या द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में वाग्धारा सचिव जायेश जोशी द्वारा कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया । इस अवसर पर गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, जन विकास संस्था के गगन सेठी,  प्रदान संस्था के श्री नरेंद्र नाथ, आर आर ए नेटवर्क के सव्यसाची दास, सहज समृद्धि के कृष्ण प्रसाद, गांधीवादी विचारक सवाई सिंह जी, राज्य बाल आयोग के शैलन्द्र पंडया ने संबन्धित विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए । सभी ने “जल,ज़मीन ,जानवर और जंगल “जैसे प्रकृतिक संसाधनों का संरक्षण अदवासी समुदाय के द्वारा किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया । डॉ वैंकटेश्वरलु ने मिट्टी परीक्षण कर उसे पूर्ण रूप से पोषित करने , प्राचीन जल संरक्षण के तरीकों को पुनर्जीवित कर जल संरक्षण करने तथा किसान संगठन बना कर अपनी फसल को बेचने पर बल दिया ।  कुमार प्रशांत ने कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा करते हुए बढ़ते बाजारीकरण के खतरों से अवगत कराते हुए कहा कि “मूल समाज के पास जो ज्ञान है, जो धन है वही सच्चा ज्ञान है, वही सच्चा धन है । “

कार्यक्रम में एक सत्र राज्य को तंबाकू मुक्त बनाने पर चर्चा के लिए भी रखा गया । इसमें  समाज सेवी संस्थाओं ने एक स्वर में तंबाकू के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की । सभी का ये मानना था कि तंबाकू नियंत्रण के कोई भी उपाय कारगर नहीं हो सकते इसीलिए पूर्ण प्रतिबंध ही इसका उपाय है । सरकार के ध्यान में ये लाने की ज़रूरत है कि समाज में किसी के लिए भी तंबाकू का एक भी फायदा नहीं है और इसके सेवन से प्रदेश में प्रतिवर्ष 50000 से अधिक लोगों की मौत हो जाती है । तंबाकू का पहला कश इंसान की जिंदगी का सबसे खतरनाक कश होता है । समाज सेवियों ने इसे हत्या करने  का लाईसेंस करार दिया।

समूह चर्चा में की गई अनुशंसा, मांग-पत्र और मुद्दे जनजातीय सम्प्रभुता पर काम कर-रही संस्थाओं और विभागों को अपनी रणनीति और कार्यक्रम तैयार करेने में मददगार होंगे। इस समागम से वागड़ भूमि पर जनजातिय समाज के बीच एक ऐसा आधार निर्मित होगा जिससे सम्मिलित विकास के माध्यम से  सच्ची-खेती को सच्चे स्वराज के मूल्यों के साथ अपना कर अपने आनेवाली पीढीयों को सच्चा-बचपन प्रदान कर सके।  आज के कार्यक्रम का समापन सांस्कृत संध्या के साथ हुआ जिसमें समुदाय के लोगों ने नृत्य तथा गीत प्रस्तुत किए ।

1 Comment

  1. Cp Choubisa says:

    धरती माता की पुजा करना हमारे जीवन मे आनन्ददायक पहल है बागधरा ने एक अच्छी पहल की है ,

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